"और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल- चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।।" (Romans 12:2).
भूले -भटके उन अपनों के , कैसे दरवाजे , खुलवाएं ? जिन लोगों ने जाने कब से , मन में रंजिश पाल रखी है इस होली पर क्यों न सुलगते दिल के ये अंगार बुझा दें ! कदम बढा कर दिल से बोलें, आओ तुमको गले लगा लें !
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भूले -भटके उन अपनों के ,
कैसे दरवाजे , खुलवाएं ?
जिन लोगों ने जाने कब से ,
मन में रंजिश पाल रखी है
इस होली पर क्यों न सुलगते दिल के ये अंगार बुझा दें !
कदम बढा कर दिल से बोलें, आओ तुमको गले लगा लें !
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