Monday, March 17, 2014
Sunday, April 29, 2012
प्रश्न : मैंने जीवन में आजतक धन जोड़ा है, अब उसको भोगना चाहता हूँ ?
उत्तर: कल भोगूँगा यही भाव हमें कंजूस बना देता है ! फिर हम पैसा जोड़ने में लग जाते है ! यदि आज ज़रुरत भी है तब भी कल के लिए जोड़ते है यदि आज तबीयत खराब है तब भी उसका ठीक उपचार नहीं करते कि पैसा लग जाएगा ! हम पैसा कमाना तो सीख लेते है लेकिन उसको सही तरीके से खर्च करना नहीं सीखते ! पैसे का सही उपयोग यही है कि मेरा तन व मन स्वस्थ रहे और मैं अपनी ज़रूरते पूरी करता रहूँ!
आप ये मन से निकाल दे कि मैं कमाता हूँ ! असलियत में आप नहीं कमाते आपके द्वारा कमाया जाता है ! मैं कमाता हूँ यही भाव अहं बढ़ा देता है फिर हम कमाए पैसे का दुरूपयोग करने लगते है ! धन कमाना तो चाहिए, बिना धन के बड़ा मुश्किल होता है लेकिन ये मन से हटा दे कि भोगने के लिए कमाना है, अन्यथा मन में यही रहेगा कि एक समय आएगा जब मैं भोगूँगा फिर भोगने तक धन को कमाते हुए जीवन गधे की तरह काम करते निकल जाता है ! जब भोगने का समय आता है तब शरीर साथ नहीं देता ! क्योंकि हमारे अन्दर भोगने का अर्थ है घर में नौकर-चाकर, होटल में खाना, घूमना- फिरना, पिक्चर देखना, पार्टी जाना,देर रात सोना आदि ! इनमें हम समझ सकते है कि ये सब भोगने के तरीके आपके स्वास्थ्य के मित्र है या शत्रु ! हमारा भोगना कुछ और नहीं बल्कि सेहत की खराबी होता है, इसलिए भोगने से पहले सावधान हो जाना !अच्छा होगा कि यदि हम भोगवृति से निकलकर योगवृति में आ जाए और कमाए धन को अपने लिए व सबके लिए यूजफुल करे !
उत्तर: कल भोगूँगा यही भाव हमें कंजूस बना देता है ! फिर हम पैसा जोड़ने में लग जाते है ! यदि आज ज़रुरत भी है तब भी कल के लिए जोड़ते है यदि आज तबीयत खराब है तब भी उसका ठीक उपचार नहीं करते कि पैसा लग जाएगा ! हम पैसा कमाना तो सीख लेते है लेकिन उसको सही तरीके से खर्च करना नहीं सीखते ! पैसे का सही उपयोग यही है कि मेरा तन व मन स्वस्थ रहे और मैं अपनी ज़रूरते पूरी करता रहूँ!
आप ये मन से निकाल दे कि मैं कमाता हूँ ! असलियत में आप नहीं कमाते आपके द्वारा कमाया जाता है ! मैं कमाता हूँ यही भाव अहं बढ़ा देता है फिर हम कमाए पैसे का दुरूपयोग करने लगते है ! धन कमाना तो चाहिए, बिना धन के बड़ा मुश्किल होता है लेकिन ये मन से हटा दे कि भोगने के लिए कमाना है, अन्यथा मन में यही रहेगा कि एक समय आएगा जब मैं भोगूँगा फिर भोगने तक धन को कमाते हुए जीवन गधे की तरह काम करते निकल जाता है ! जब भोगने का समय आता है तब शरीर साथ नहीं देता ! क्योंकि हमारे अन्दर भोगने का अर्थ है घर में नौकर-चाकर, होटल में खाना, घूमना- फिरना, पिक्चर देखना, पार्टी जाना,देर रात सोना आदि ! इनमें हम समझ सकते है कि ये सब भोगने के तरीके आपके स्वास्थ्य के मित्र है या शत्रु ! हमारा भोगना कुछ और नहीं बल्कि सेहत की खराबी होता है, इसलिए भोगने से पहले सावधान हो जाना !अच्छा होगा कि यदि हम भोगवृति से निकलकर योगवृति में आ जाए और कमाए धन को अपने लिए व सबके लिए यूजफुल करे !
Tuesday, November 29, 2011
MOST BEAUTIFUL TOURIST SPOT
There is a place you can come where everything is beautiful. Tourists travel from place to place looking for beauty. With photos, and souvenirs, they try to take the beauty back home with them. They only get tired, and tanned.
Yet the most beautiful spot anywhere is right here. When you come here, you find that everything is so beautiful wherever you are.
Where is this place?
Don’t look here, and there; come within you.
When you are here, then any place becomes beautiful.
Then wherever you go, you add beauty there.
If you are unhappy, even the moon irritates you, sweet things nauseate, music disturbs. When you are calm, and centered inside, noise is musical, clouds are magical, rain is liquid love.
Book yourself on a trip to this most beautiful place in the universe.
Then you’ll find that every day is a vacation, and a celebration.
(BY SHRI SHRI RAVI SHANKER JI)
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