Sunday, April 29, 2012

प्रश्न : मैंने जीवन में आजतक धन जोड़ा है, अब उसको भोगना चाहता हूँ ?

उत्तर: कल भोगूँगा यही भाव हमें कंजूस बना देता है ! फिर हम पैसा जोड़ने में लग जाते है  ! यदि आज ज़रुरत भी है तब भी कल के लिए जोड़ते है यदि आज तबीयत खराब है तब भी उसका ठीक उपचार नहीं करते कि पैसा लग जाएगा ! हम पैसा कमाना तो सीख लेते है लेकिन  उसको सही तरीके से खर्च करना नहीं सीखते ! पैसे का सही उपयोग यही है कि मेरा तन व मन स्वस्थ रहे और मैं अपनी ज़रूरते पूरी करता रहूँ!

आप ये मन से निकाल दे कि मैं कमाता हूँ ! असलियत में आप नहीं कमाते आपके द्वारा कमाया जाता है ! मैं कमाता हूँ यही भाव अहं बढ़ा देता है फिर हम कमाए पैसे का दुरूपयोग करने लगते है ! धन कमाना तो चाहिए, बिना धन के बड़ा मुश्किल होता है लेकिन ये मन से हटा दे कि भोगने के लिए कमाना है, अन्यथा मन में यही रहेगा कि एक समय आएगा जब मैं  भोगूँगा फिर भोगने तक धन को कमाते हुए जीवन गधे की तरह काम करते निकल जाता है !  जब भोगने का समय आता है तब शरीर साथ नहीं देता ! क्योंकि हमारे अन्दर भोगने का अर्थ है घर में नौकर-चाकर, होटल में खाना, घूमना- फिरना, पिक्चर देखना, पार्टी जाना,देर रात सोना आदि ! इनमें हम समझ सकते है  कि ये सब भोगने के तरीके आपके स्वास्थ्य के मित्र है या शत्रु ! हमारा भोगना कुछ और नहीं बल्कि सेहत की खराबी होता है, इसलिए भोगने से पहले सावधान हो जाना !अच्छा होगा कि यदि हम भोगवृति से निकलकर योगवृति में आ जाए और कमाए धन को अपने लिए व सबके लिए यूजफुल करे !